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बारिश का एक दिन

                                                       बारिश का एक दिन


२२ जून को आशू (मेरी खाला) और मुझे सहारागंज जाना था उसका जूता ठीक कराने के लिए| फिर मम्मी ने कहा कि सहारागंज बहुत दूर है और वुडलैंड का शोरूम तो वेव मैं भी है, तो तुमलोग वेव ही चले जाओ| जब हमलोग शाम मैं ५ बजे घर से निकले और बी ब्लाक पहुंचे ऑटो के लिए तो हमलोग १० मिनट तक ऑटो का इंतज़ार किया पर हमलोगों को ऑटो नहीं मिली| ऐसा लग रहा था जैसे लखनऊ में कोई एग्जाम था क्यूंकि सारी ऑटो स्टूडेंट्स से भरी हुई थी| और उसी वक्त फिर थोड़ी तेज़ हवा चलने लगी और बूंदा-बांदी भी शुरू हो गयी| पेड़ की पत्तियाँ जोर-जोर से इधर-उधर हिलने लगे| हमलोग तो पास में रहते हैं पर उनलोगों का क्या जो यहाँ दूर से आये थे| हमलोगों ने सोचा कि वापस घर चलते हैं| जब हमलोग मिश्रा मेडिकल स्टोर के पास पहुंचे तो बारिश बहुत तेज़ शुरू हो गयी| माहौल तो ऐसा हो गया था कि लग रहा था सारे पेड़ हमपर गिर जायेंगे| दुकानों पर लगी ग्रीन शेल्टर पड़-पड़ आवाज़ कर रही थी| हमलोग जल्दी - जल्दी घर भागे, हमलोग बारिश मैं बहुत भीग गए थे| हमारे कपडे बदन से चिपक रहे थे और मेरी चप्पल में पत्थर -कंकड़ लग रहे थे| उस कंकड़ के वजह से मुझे चलने में कठिनाई हो रही थी| जब हमलोग घर पहुंचे तो जल्दी से नहाए और कपड़ा बदले| कपड़ा बदलकर जब मैं नीचे आई तो मैनें दूध पिया| फिर उतनी देर मैं वृष्टि आ गयी, उसने अपने दादी का दिया हुआ नया लेपर्ड प्रिंट पयजामा और येलो रंग का पोल्का डॉट्स वाला टॉप पहना था| मैनें उसके कपडे की तारीफ की, उसके बाद मैं उसके साथ खेलने लगी| हमलोग ऊपर वाले कमरे में लैपटॉप पर गेम्स खेल रहे थे| हमलोग मंकी क्वेस्ट नाम का एक गेम खेल रहे थे| आधे-एक घंटे बाद मम्मी ऊपर आई और बोली कि वो और आशु सब्ज़ी लेने जा रही हैं| मम्मी के जाने के बाद ८:३० बजे वृष्टि की मम्मी उसे लेने आगयीं और वो चली गयी| उसके जाने के बाद मैं नीचे आकर अपनी नार्निया नाम की नावेल पढने लगी| ९ बजे के करीब मम्मी और आशु आ गए, इतनी सारी सब्ज़ी लेके आये थे वोलोग, लग रहा था कि पूरी दुकान उठा लाये हैं| उसके बाद सामान रखकर उनलोगों ने खाना लगाना शुरू किया|  


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