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नानी का घर और खूब सारी मस्ती

          छुट्टियों में नानी का घर हो और भाई-बेहेन हों, तो उसका आनंद ही कुछ और है। इस बार होली की छुट्टी में मैं नानी के घर गयी हुई थी। वहाँ मेरे भाई-बहन  भी आये हुए थे। पूरे दो साल बाद सबसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मेरी खाला सऊदी  से आई हुई थीं। उनसे मिलने के लिए हम सब वहाँ गए थे । मेरी दोनों छोटी बहनें भी थीं, इरम और मायरा। मेरा छोटा भाई सायम और दो बड़े भाई शाज़ान  और शाबी  भी थे । सबलोगों में इतने सारे बदलाव आ गये थे दो सालों में । 
          इरम और मायरा दोनों बड़ी हो गयी थीं । और इरम तो बड़े होने के साथ - साथ और बदमाश हो गयी थी । सायम लम्बा और पतला हो गया था । मुझे तो यह समझ नहीं आता कि मेरे जितने भाई हैं, वो सब इतने ज्यादा पतले क्यों हैं !!! मैं तो अपने भाइयों पर बिलकुल भी नहीं गयी हूँ । खैर! शाबी भईया ने तो थोड़ी सी सेहत बना ली है । शाज़ान भईया  में तो एक ही बदलाव था जो हर साल होता है ! वो है उनकी लम्बाई । लगता है की अब बुर्ज़ खलीफा बन कर ही दम लेंगे ! 
          बदलाव तो हम सब में आते ही हैं... लेकिन हमलोगों की मस्ती कभी नहीं बदलती । और, मेरी और शाज़ान भईया की लड़ाई भी हमेशा कायम रहती है । नहीं दोस्तों ! यह मत सोचियेगा कि उस लड़ाई के पीछे कोई कारण है। क्योंकि ऐसा कुछ नहीं है । हम दोनों हर साल जब मिलते है, तो थोड़े  समय के लिए  एक - दुसरे से बात नहीं करते हैं और फिर अपने -आप बात करने लगते हैं । यह भी हमारी मस्ती और पागल्पंती  में आता है।  नानी के घर की छत भी हमारे लिए बहुत एहेमियत रखती है । आखिर वहीँ पर तो हम लोग खेल - कूद कर इतने बड़े हुए हैं । छत की सीढ़ियों पर कूदना और फिर छत पर चढ़कर दौड़ना । सबसे ज्यादा मज़ा तो तब आता है जब हमलोग रात में छत पर जाते हैं और भूत वाली कहानी सुनते हैं । एक बार जब मैं छोटी थी तो हमलोग ऐसे ही रात में छत पर बैठकर बातें कर रहे थे। तब ही अचानक से मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा। मैं बहुत डरी हुई थी। जब मुड़कर देखा तो वो और कोई नहीं पर शाबी भईया थे । मुझे डराने में उनको पता नहीं क्या मज़ा आता है । इरम और मायरा के साथ इस बार मैनें खूब समय बिताया। मैं दिन भर उन दोनों के साथ खेलती थी। उन दोनों के मुह से सना अप्पी सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगता था। 
          इस बार शाम में एक दिन हम सब भाई - बेहेन छत पर जाकर बैठे थे । शाज़ान भईया और शाबी  भईया हम सब के लिए चॉकलेट लाये थे। छत पर बैठकर हम सब चॉकलेट खा रहे थे और भूत वाली कहानी सुन रहे थे। बहुत सारी तस्वीरें भी लीं थीं। 
          मैनें इस बार बहुत मज़ा किया। वहां पर से वापस आने का मन ही नहीं कर रहा था। 
हमारे कुछ यादगार पलों की तस्वीरें







        

Comments

  1. That's really fab...
    Humare yaadon kA pitara :)

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  2. Fabulous Sana..
    You are just a "Star"..
    Keep writing, keep Shining..

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  3. That's really fab...
    Humare yaadon kA pitara :)

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  4. सबको दिल से बहुत बहुत शुक्रिया!!

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  5. yaadon ka pitara ......humdono ke liye ye aangan bahut khubsurat hai .....shayad isse zayada khoobsurat jagah hamare liye or koi nahi...

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  6. tumhari likhawat itni achi hai ki bahut kam ilfazon me pura emotion jhalak raha hai ........very good

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. बढि़या है। लेकिन क्‍या-क्‍या हुआ, क्‍या मजा आया, क्‍या किया, यह सब और डिटेल में होता तो चार चांद लग जाता।

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  9. शुक्रिया माँ

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  10. जी पापा... कोशिश करुँगी इम्प्रूव करने की

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  11. This comment has been removed by the author.

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  12. उम्र के लिहाज़ से बहुत अच्छा लिखा है।

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